(अनुबम)
(तम्बाकू )
"उठ.... जाग.... और तेरा येय िस न हो तब तक चैन न लेना।"
उपिनष
"यिद तुम अपने आपको जान लोगे तो तुम्हें िकसी भोग के...
(तम्बाकू ) ..................................................................................................................
नशे से सावधान
(तम्बाकू )
भुक्... छु क्....भुक्....छु क्... आवाज़ करती शेन जंगल में से गुज़र रही है। उसके एक
िड बे में िकतने ...
गये। िजन चूहों के शरीर पर तम्बाकू की ःयाही नहीं लगायी गयी थी और उन्हें उनके साथ रखा
गया था उन्हें कोई हािन न हुई। इस ूयोग ...
है। तम्बाकू के कारण िजतनी अकाल मृत्यु होती है उनका अनुमान लगाना किठन है। तम्बाकू में
हािनकारक जहरीली वःतुएँ बहुत-सी ह। उनम...
यह भी जानने में आया है िक जो बीड़ी छोड़ देते ह उनका शरीर पुनः पु हो जाता है। ओजरी
और आँतों के घाव िमटने में तम्बाकू अटकाव कर...
काग की सूजन
एक ूचिलत मन्थ कहता है िक गला और काग में सूजन होने के िकतने ही कारण ह,
िजसमें से एक कारण तम्बाकू का धुआँ है। कई...
ूातःकाल ज दी उठो। िबःतर पर बैठकर ढ़ िन य करो िकः 'आज दो बीड़ी कम करना
है। हिर ॐ... ॐ.... ॐ....! इतना बल तो मुझमें है ही। हिर...
एक डॉक्टर का अनुभव
िड बे में बैठे वे डॉक्टर महाराजौी की बाते यान से सुन रहे थे। वे बोल उठेः
"तम्बाकू का सेवन करनेवाले और उ...
यिद एक बीड़ी पीने से ूभु-भि का इतना अिधक फल न हो जाये तो रोज दस बीड़ी
पीने वाले मनुंय की परलोक में क्या दशा होगी? वह अगर सार...
(सुमे पवर्त) भी न होगा। इतने िवशाल पृथ्वी और समुि को भी काल एक िदन िनगल
जायेगा। राक्षस और राक्षसािधपित भी काल से न बच सके ...
दौलत, बंगले, जमीन िजतना भी होगा वह दूसरों का हो जायेगा और आप उस समय एक
सुनसान जंगल में िग , कु ों और गीदड़ों से िघरे भयंकर ...
यह राक्षस तम्बाकू आपको और आपके शरीर को बबार्द कर रहा है। इसिलए अपनी आँखें खोलो
तो आपको ही लाभ है। परन्तु याद रखना, कभी भूल...
बीड़ी पीने की िमऽो ! आदत जब पड़ जायेगी।
ना होने पर माँगते जरा शमर् ना हीं आयेगी।।
माँगने से मरना भला यह एक सच्चा लेखा है।
िक...
यिद िकसी को चाय-कॉफी का व्यसन छू टता न हो, िकसी कारणवशात ् चाय-कॉफी जैसे
पेय की आवँयकता महसूस होती हो तो उससे भी अिधक रूिच...
भारत जैसे गरीब देश में ूितिदन मजदूरी करके जीिवका चलाने वाले लोग अ प आय
का अिधकाँश तो शराब या गाँजे में खचर् कर देते डालते ...
न होती जाती है। कु छ लोग पागल बन जाते ह। कभी अकाल मृत्यु का िशकार हो जाते ह।
इं लड, जमर्नी, अमेिरका आिद देशों में जहाँ अिध...
बोतल का दारू दस पीढ़ी तक िवनाशकारी ूभाव रखता है तो राम नाम की प्यािलयाँ
इक्कीस पीिढ़यों को पार लगाने का सामथ्यर् रखे, यह ःवा...
"बहन ! तुम क्या बेचती हो?"
"म पाप बेचती हँू। म लोगों से ःवयं कहती हँू िक मेरे पास पाप है, मज हो तो ले लो।
िफर भी लोग चाहत ...
यिद कोई अित दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भ होकर मुझे िनरंतर भजता है तो
उसे साधु ही मािनये। कारण िक वह यथाथर् िन यवाला है।...
Nashe se sabdhan
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Nashe se sabdhan

Published on: Mar 3, 2016
Published in: Spiritual      
Source: www.slideshare.net


Transcripts - Nashe se sabdhan

  • 1. (अनुबम)
  • 2. (तम्बाकू ) "उठ.... जाग.... और तेरा येय िस न हो तब तक चैन न लेना।" उपिनष "यिद तुम अपने आपको जान लोगे तो तुम्हें िकसी भोग के पीछे भागने की आवँयकता न रहेगी। अतएव आत्म-साक्षात्कार करो।" (अनुबम) ूःतावना आत्मभाव से सृि का सॆाट बनने के िलए िनिमर्त मानव जीवभाव से कै से पतन के गतर् में िगरता जाता है और ःवयं को ही क देता है उसका उ म उदाहरण देखना हो तो आप धूॆपान और सुरा जैसे व्यसनों के ूेमी व्यि को देख लीिजए। धूॆपान और सुरा के रिसक देवताओं के मंिदर के समान अपने शरीर को जलती िचता जैसा बना देते ह। यह आ यर् की बात नहीं लगती? एक ूकार से इसे बुि का िदवाला ही कहा जाएगा। मानव को इस गतर् से बाहर िनकालने के िलए अनेक महापु षों नें युग-युग से ूय िकये ह। आज उन्हीं ूय ों में से एक यह 'नशे से सावधान' नामक पुिःतका आपके समक्ष ूःतुत की जा रही है। आशा है िक लोगों के अधोगामी जीवन को उ वर्गामी बनाने और िदव्य जीवन जीने को ूेिरत करने में यह पुःतक उपयोगी रहेगी। हमारी ूाथर्ना है िक स जन ःवयं इस जीवन का िनमार्ण करने वाली पुिःतका को पढ़ें और इसे घर-घर पहँुचायें। अिधक पुःतकें मँगवा कर बाँटने के इच्छु क स जनों को िरयायत मू य से पुःतकें दी जायेंगी। गाँव-गाँव घर-घर में लोग व्यसनों से मु हों इसके िलए हम सब किटब हों। पत्थरों के मंिदरों का जीण ार भले होता रहे परन्तु मानव मंिदरों का जीण ार अवँय ही तेजी से होना चािहए। यह योगदान हम सबके िहःसे में आता है। अतः पुनः हमारी िवनती है िक यह पुःतक पढ़ें और जैसे तैसे अिधकािधक लोगों को पढ़ाने में िनिम बनकर मानव मंिदर का रक्षण करें। इस पिवऽ कायर् का लाभ परमात्मा आपको अवँय देगा, देगा और देगा। ौी योग वेदान्त सेवा सिमित अनुबम नशे से सावधान................................................................................................................................. 4
  • 3. (तम्बाकू ) .......................................................................................................................................... 4 तम्बाकू की ःयाही का िवषैला ूभाव.................................................................................................... 4 तम्बाकू से होने वाले रोग.................................................................................................................... 5 फे फड़ों में कसर .............................................................................................................................. 5 मुँह और गले का कै न्सर ................................................................................................................. 5 हाटर् अटैक ..................................................................................................................................... 6 पेट के रोग..................................................................................................................................... 7 अंधापन ........................................................................................................................................ 7 काग की सूजन............................................................................................................................... 8 मूखर्तापूणर् तकर् .................................................................................................................................. 8 एक डॉक्टर का अनुभव..................................................................................................................... 10 तम्बाकू से धािमर्क हािन................................................................................................................... 10 भाईयो ! चेत जाओ... ....................................................................................................................... 12 काल के जाल से कौन मु है? ........................................................................................................... 13 बीड़ी पीने वालों का हाल.................................................................................................................... 14 चाय-कॉफी ने िकया हुआ सवर्नाश..................................................................................................... 15 ःवाःथ्य पर भयानक कु ठाराघात.................................................................................................. 15 आयुविदक चाय........................................................................................................................... 16 मादक पदाथर्.................................................................................................................................... 16 दारू................................................................................................................................................. 17 महानुभावों के वचन ......................................................................................................................... 19 आठ पापों का घड़ा............................................................................................................................ 19 व्यसनों से मुि िकस ूकार? ........................................................................................................... 20 यह दःु ख शाप था या वरदान?............................................................................................................ 21 वाह मेरी नैया के तारणहार................................................................................................................ 22 एक ही झटके में व्यसन से मुि ........................................................................................................ 23 वाह रे व्यसन तेरे रंग ! ..................................................................................................................... 23 उदगार.... ........................................................................................................................................ 24
  • 4. नशे से सावधान (तम्बाकू ) भुक्... छु क्....भुक्....छु क्... आवाज़ करती शेन जंगल में से गुज़र रही है। उसके एक िड बे में िकतने ही नवयुवक, दो चार व्यापारी एक डॉक्टर और इन सबमें िनराले लगते ेत- व धारी एक संत याऽा कर रहे ह। उन्होंने दो-चार लोगों को बीड़ी-िसगरेट पीते देखा िक तुरन्त उन्हें रोकते हुए कहाः "भाइयो ! आपको शायद खराब लगेगा परन्तु आपके क याण की एक बात म कहना चाहता हँू। आप बुरा न मानें। आप ठाठ से धूॆपान कर रहे ह परन्तु उससे होने वाली हािन का आपको पता न होगा। अपने संपकर् में आने वाले अनेकों बड़े-बड़े डॉक्टरों से जो कु छ मने सुना है, उसके आधार पर तम्बाकू के अवगुणों के सम्बन्ध में आपको कु छ सूचनाएँ देता हँू। आप यानपूवर्क सुनें और िफर आपकी िववेक-बुि जैसा कहे वैसा करना।" सादे व ों में ूभावशाली व्यि त्व वाले इन महाराज ौी की आकषर्क आवाज सुनकर िड बे में बैठे सब का यान उनकी ओर गया। धूॆपान करने वाले स जनों ने बीड़ी-िसगरेट िखड़की से बाहर फै क दी और यानपूवर्क सुनने के िलए तत्पर हो गये। महाराजौी ने सबकी ओर देखते हुए अमृतवाणी का झरना बहायाः "अभी-अभी डॉक्टरों ने यह िस िकया है िक ूितिदन एक बीड़ी या िसगरेट पीने वाले व्यि की आयु में ूितिदन छः िमनट कम हो जाते ह। दस बीड़ी पीने वाले के जीवन का रोज एक घंटा कम हो जाता है। एक िसगरेट या बीड़ी पीने वाले व्यि के र में बीस िमनट के अन्दर ही तम्बाकू के अन्य दूषणों के साथ टार और िनकोटीन नामक काितल िवष िमल जाते ह। िव ान ने िस करके िदखाया है िक उस व्यि के पास बैठने वाले को भी धुएँ से उतनी ही हािन होती है। नशा करने वाला व्यि र में तो िवष िमलाता ही है, साथ ही साथ, पास में बैठे हुए लोगों की आरो यता का भी अनजान में सत्यानाश करता है। (अनुबम) तम्बाकू की ःयाही का िवषैला ूभाव तम्बाकू एक मीठा िवष है। िजस ूकार दीपक के तेल को जलाकर उसका काजल एकिऽत िकया जाता है उसी ूकार अमेिरका के दो ूोफे सर, मेहम और वाइन्डर ने तम्बाकू जला कर उसके धुएँ की ःयाही इक्टठ की। उस तम्बाकू की ःयाही को अनेकों ःवःथ चूहों के शरीर पर लगाया। पिरणाम यह हुआ िक िकतने चूहे तो तत्काल मर गये। अनेकों चूहों का मरण दो-चार मास बाद हुआ जबिक अन्य अनेकों चूहों को त्वचा का कसर हो गया और वे घुट-घुट कर मर
  • 5. गये। िजन चूहों के शरीर पर तम्बाकू की ःयाही नहीं लगायी गयी थी और उन्हें उनके साथ रखा गया था उन्हें कोई हािन न हुई। इस ूयोग से िस हो गया िक तम्बाकू का धुआँ शरीर के िलए िकतना खतरनाक है। डॉक्टरों का जो बड़े से बड़ा कालेज है रॉयल कालेज उसके डॉक्टरों ने एक िनवेदन ारा अिखल िव डॉक्टरों को चेतावनी दी है िक तम्बाकू से शरीर में कौन-कौन से रोग होते ह, इसका यान रखें और रोगी को तम्बाकू पीने से रोकें । (अनुबम) तम्बाकू से होने वाले रोग फे फड़ों में कसर रॉयल कालेज की िरपोटर् बताती है िक तम्बाकू के कारण अनेकों को फे फड़ों की बीमारी होती है, िवशेषकर कै न्सर। फे फड़ों की बीमारी के कारण अपने देश में बड़ी सं या में मृत्यु होती है। अतः िब कु ल बीड़ी न पीना ही इसका सबसे सुन्दर इलाज है। ऐसी बीमारी डॉक्टरों के िलए भी एक चुनौती है। इसमें कोई सन्देह नहीं िक फे फड़ों के कै न्सर का मु य कारण तम्बाकू है। इसके अितिर पुरानी खाँसी भी बीड़ी पीने का कारण ही होती है। बड़ी आयु में खाँसी के कारण बड़ी सं या में मृत्यु होती है और ःवाःथ्य न होता है। इससे ऐसे लोगों की िजन्दगी दःु खपूणर् हो जाती है। दमा और हाँफ का मूल खाँसी है िजसके कारण मानव बड़ा परेशान होता है और किठनाई में पड़ जाता है। क्षय के रोगी के िलए तो बीड़ी बड़ी हािनकारक है। अतः क्षय के रोिगयों को तो बीड़ी कभी न पीनी चािहए। टी.बी. वाले रोगी दवा से अच्छे हो जाते ह परन्तु तम्बाकू -बीड़ी पीना चालू रखने के कारण उनके फे फड़े इतने कमजोर हो जाते ह िक उन्हें फे फड़ों का कै न्सर होने का भय िनरन्तर बना रहता है। (अनुबम) मुँह और गले का कै न्सर मुँह का कै न्सर और गले का कै न्सर, ये भी बीड़ी पीने वाले को अिधक माऽा में होता है। जो व्यि बीड़ी पीता है वह फे फड़ों में पूरी माऽा में हवा नहीं भर सकता. इससे उसे काम करने में हाँफ चढ़ती है। हवा पूरी तरह न भरने से ूाणवायु पूरा नहीं िमल पाता और इससे र पूरी तरह शु नहीं हो पाता। ःकू ल और कालेज में देखने में आता है िक होिशयार िव ाथ तम्बाकू नहीं पीते। तम्बाकू पीने से सहनशि कम हो जाती है और ऐसे व्यि अिधकाँशतः अधर्पागल (Whimsical Neurotic) होते ह। तम्बाकू पीने से शरीर को कोई लाभ नहीं। तम्बाकू पीने से आयु कम होती
  • 6. है। तम्बाकू के कारण िजतनी अकाल मृत्यु होती है उनका अनुमान लगाना किठन है। तम्बाकू में हािनकारक जहरीली वःतुएँ बहुत-सी ह। उनमें टार और िनकोटीन ये दो ूमुख ह। 20 िमनट में ये दोनों र में िमलकर शरीर को बहुत हािन पहँुचाते ह। अमग य वै ािनकों का यह मानना है िक धूॆपान से कसर होता है। ूत्येक ूकार के धूॆपान में भयंकर जोिखम िनिहत होता है, िजसका अनुभव हमें तत्काल नहीं अिपतु वष बाद होता है। धूॆपान की समानता गोली भरी बन्दूक से की जा सकती है िजसका घोड़ा दबाते ही नुकसान होता है। धूॆपान का समय घोड़ा दबाने का काम करता है। फे फड़ों का कै न्सर दूर करने के िलए उच्च ूकार की श यिबया की आवँयकता पड़ती है। अःपताल में लाये जाने वाले ूत्येक तीन रोिगयों में से एक रोगी की श यिबया ही सफल हो पाती है, बाकी के दो अकाल मृत्यु के मुँह में पड़ जाते ह। इस ूकार कै न्सर दूर िकये व्यि यों में से 85 ूितशत के वल 5 वषर् में और अिधकतर लोग दो वषर् में ही मृत्यु को ूा होते ह। बीसवीं शता दी का अित उन्नत िव ान भी उन्हें बचाने में असफल रहता है। धूॆपान न करने वाले को फे फड़ों का कै न्सर होता ही नहीं। तम्बाकू से िनकलते धुएँ से बने कोलटार में लगभग 200 रासायिनक पदाथर् रहते ह। उनमें से िकतने ही पदाथ से कै न्सर होने की सम्भावना है। इंगलड के डॉक्टर डाल और ूो. िहल की िरपोटर् में यह िस िकया गया है िक िव िव यात ःलोन के टिरंग कै न्सर इन्सटीच्यूट के मु य िनयामक डॉक्टर हो ज़ भी धूॆपान और कै न्सर के म य ूगाढ़ सम्बन्ध मानते ह। बम्बई के इंिडयन कै न्सर इन्सटीच्यूट के डायरेक्टर डॉ. खानोलकर भी बीड़ी पीने से कै न्सर होना मानते ह। इंगलड और अमेिरका की सरकार ने िसगरेट बनाने वाली कम्पिनयों के िलये िनयम बनाये ह िक वे अपनी िसगरेट से होने वाली बीमािरयों की जानकारी भी ूजा को अवँय दें। भारत सरकार ने भी अब ऐसा िनयम बनाया है परन्तु व्यसन में अंधे लोग ये चेतावनी देखकर भी नहीं कते और अपने तन और जीवन को न करते ह। (अनुबम) हाटर् अटैक तम्बाकू माऽ फे फड़ों की बीमारी ही लाती है ऐसा नहीं अिपतु वह दयरोग भी लाती है। यह भी जानने में आया िक बीड़ी पीने वालों को दय की बीमारी अिधक माऽा में होती है। इसीिलए तम्बाकू का उपयोग करनेवालों का अिधकांशतः हाटर् फे ल हो जाता है। इसी ूकार नसों की बीमािरयों के िलए भी बीड़ी ही उ रदायी है। बीड़ी भूख कम करती है, अतः पाचनशि घट जाती है। पिरणामःवरूप शरीर कं काल और बहुत ही दुबर्ल होता जाता है। िकन्तु इसके िवपरीत
  • 7. यह भी जानने में आया है िक जो बीड़ी छोड़ देते ह उनका शरीर पुनः पु हो जाता है। ओजरी और आँतों के घाव िमटने में तम्बाकू अटकाव करती ह, अतः घाव तत्काल ठ क नहीं हो पाता। सामान्यतः दय की धड़कनों और उसकी हलचल का िवचार नहीं आता परन्तु िकतने ही कारणों (िजनमें से एक कारण तम्बाकू भी है) से दय की धड़कनें बढ़ती ूतीत होती ह िजससे मनुंय को घबराहट होती है। दय िनयिमत रूप से संकु िचत और ूसािरत होता है परन्तु िकतने ही रोगों में रोगी का दय अिधक संकु िचत हो जाता है अथवा अिधक तेजी से चलने लगता है। ये दोनों रोग तम्बाकू के कारण भी हो सकते ह िजसमें कभी-कभी हाटर् फे ल होने का भय रहता है। इसी ूकार र वािहनी नसों की बीमािरयाँ भी तम्बाकू के कारण ही होती ह। र वािहिनयों में र ॅमण की अिनयिमतता होती है िजसके कारण थोड़ा सा काम करने से ही हाथ, पैर और िसर दुखने लगते ह। र वािहनयों में सूजन होना, इस नाम का दूसरा रोग (Blood clotting) भी होता है िजसमें नसों में लहू जम जाता है और ूवाह मंद हो जाता है। इसके इलाज के िलए वह अंग ही कटवाना पड़ता है। (अनुबम) पेट के रोग िकतने ही लोग तकर् देते ह िक बीड़ी न िपयें तो पेट में गोला उठने लगता है। पेट में बल पड़ना (आँतों में गाँठ लग जाना) आिद तम्बाकू के कारण होता है। इस रोग के रोगी को तम्बाकू अिधक पीने से रोग अिधकािधक बढ़ता है। जठर की खराबी िजसके कारण अपच होती है, उस रोग का कारण तम्बाकू हो सकता है। तम्बाकू के व्यसनी को जठर और आँतों के पुराने घाव होने की बहुत संभावना होती है। (अनुबम) अंधापन एक अन्य मंथ में िलखा है िक अिधक तम्बाकू चबाने से, तम्बाकू पीने से अथवा तम्बाकू के कारखाने में काम करने से कभी-कभी अंधापन भी आ सकता है। आरंभ में ि कमजोर होती जाती है िजसे चँमा पहनने से भी सुधारा नहीं जा सकता। इस रोग को अंमेजी में (Red green colour blindness) कहते ह। रोग दोनों आँखों में होता है। इसका सबसे अच्छा इलाज यही है िक तम्बाकू न चबायें, तम्बाकू न िपयें और न ही नसवार लें। तम्बाकू के कारखाने में काम न करें। इसके अितिर और कोई इलाज नहीं है। (अनुबम)
  • 8. काग की सूजन एक ूचिलत मन्थ कहता है िक गला और काग में सूजन होने के िकतने ही कारण ह, िजसमें से एक कारण तम्बाकू का धुआँ है। कई लोगों के मुँह में लार टपकती है, उसका कारण भी तम्बाकू हो सकता है। (अनुबम) मूखर्तापूणर् तकर् इस ूकार तम्बाकू के सेवन से बहुत से रोग होते ह परन्तु बहुत से लोग रोगों के उपाय के रूप में तम्बाकू सेवन की सलाह देते ह। वे लोग समझते नहीं िक तम्बाकू ःवयं ही बीमािरयों की जड़ है। अपने शरीर को तुच्छ बीमारी से बचाने के िलए भयंकर बीमारी को िनमंिऽत करना, यह तो मूखर्ता ही है। बकरा िनकालने में ऊँ ट घुसा देना कहाँ की बुि मानी है? यिद आपको गोला चढ़ता है तो िजतनी भूख हो उससे थोड़ा कम खाओ, पेट भरकर मत खाओ। सं या को ताजी हवा खाने के िलए खाने के िलए सैर करने जाओ तो शरीर में ःफू ितर् रहेगी और वायु नहीं चढ़ेगी। आलू, बगन, गोभी जैसी वायु-वधर्क वःतुएँ न खाओ और चावल भी कम खाओ। इससे वायु नहीं चढ़ेगी। लहसुन प्याज, पुदीना और अदरक का सेवन करने से वायु का नाश होता है। 100 माम स फ, 100 माम अजवायन और थोड़ा सा काला नमक लेकर उसमें दो बड़े-बड़े नींबू िनचोड़ों। इस िमौण को तवे पर सेंक कर रख लो। जब भी गैस की तकलीफ हो, बीड़ी की आवँयकता अनुभव हो तब इनमें से थोड़ा सा िमौण लेकर चबाओ। इससे गैस िमटेगी, र सुधरेगा, पाचनशि बढ़ेगी और भूख खुलेगी। बीड़ी डािकनी की लत छोड़ने में बहुत सहायता िमलेगी। वायु िमटाने के िलए अन्य भयंकर रोग पैदा करने वाली बीड़ी पीना यह तो सरासर मूखर्ता ही समझो। बीड़ी (तम्बाकू ) नशीली वःतु है। इसिलए वाःतव में तो इसका तत्काल त्याग करना ही चािहए। कदािचत एक दो िदन किठनाई हो पर इससे क्या? शाबाश! वीर शाबाश ! ढ़ संक प करो, िहम्मत रखो। िनकालो जेब में से बीिड़याँ और फक दो िखड़की से बाहर। सोच क्या रहे हो? थूक दो इस डािकनी पर। 'धीरे-धीरे छोड़ूँगा' ये मन के नखरे ह। इससे सावधान ! इन सब मन की बातों में नहीं आना। छलांग मारो इस डाकनी पर। फें क दो... थूक दो बीड़ी पर। ढ़ संक प करो। इसकी क्या िहम्मत है तुम्हारे होठों पर पहँुच सके ? यिद आप में इस डािकनी को छोड़ने की ढ़ता न हो तो एक उपाय यह भी हैः
  • 9. ूातःकाल ज दी उठो। िबःतर पर बैठकर ढ़ िन य करो िकः 'आज दो बीड़ी कम करना है। हिर ॐ... ॐ.... ॐ....! इतना बल तो मुझमें है ही। हिर ॐ.....ॐ....ॐ....! इस ूकार दस िदन में तुम्हारी बीस बीड़ी छू ट जायेगी। िकतने ही लोग ऐसा तकर् करते ह िक पड़ी आदत छू टती नहीं। अपने पर इतना भी काबू नहीं? तब आप संसार में दूसरों का क्या भला कर सकें गे? ःवयं अपने आप पर इतना उपकार नहीं कर सकते तो दूसरों के िलए क्या तीर मारोगे? आप के वल बीड़ी छोड़ने की ढ़ इच्छा करो तो िफर बीड़ी की क्या मजाल है िक वह आपके पास भी फटक सके ? बीड़ी अपने आप सुलग कर तो मुख में जाने से रही? और बीड़ी के बदले ूकृ ित ारा ब शी सुंदर वःतुएँ जैसे िक ल ग, काली िकशिमश, तुलसी, काली िमचर् आिद मुख में रखें तो बीड़ी की कु टैव अपने आप छू ट जायेगी। िकतने ही लोग ऐसा तकर् देते ह िक वे बीड़ी नहीं पीते, िचलम पीते ह। अरे भाई ! साँप के बदले चंदन को काटे तो अन्तर क्या? शरीर को जो हािन होती है वह तम्बाकू और उसके धुएँ में िनिहत जहर से ही होती है। अतः तुम बीड़ी िपयो या िसगरेट, िचलम िपयो या हुक्का, नसवार सूँघो या नसवार खींचो अथवा तम्बाकू पान में डाल कर खाओ, बात तो एक ही है। उससे िवष शरीर में जायेगा ही और शरीर में भयंकर रोग पैदा होंगे ही। इसमें संःकार का भी ू है। आप बीड़ी पीते होंगे तो आपका पुऽ क्या सीखेगा? वही लक्षण वही आदतें जो आपमें मौजूद ह। इसका अथर् यही िक आप अपने बच्चे को जीवन-डोर भी कम करना चाहते ह। आप बीड़ी से होने वाले ूाणघातक बीमािरयों में उसे धके लना चाहते ह, आप अपने बच्चे की िज़न्दगी से खेल रहे ह। आप अपने बच्चे की भलाई के िलए बीड़ी छोिड़यए। डॉक्टरों ने िस िकया है िक िजसके र में दारू से आया अ कोहल होता है ऐसे शरािबयों के बेटों के बेटों के ..... इस ूकार दस पीिढ़यों तक आनुवांिशक र में अ कोहल का ूभाव रहता है िजसके कारण दसवीं पीढ़ी के बालक को आँख का कै न्सर हो सकता है। आप अपने बालक के साथ तथा अपने वँशजों के साथ ऐसा जु म क्यों करते हो? आपके िनद ष बच्चों ने आपका क्या िबगाड़ा है िक उनमें खराब लक्षणों के बीजारोपण करते हो? अमेिरका में नवीन जन्मे 7500 बच्चों के िनरीक्षण से ात हुआ िक बीड़ी-तम्बाकू के व्यसिनयों के बच्चे तुलनात्मक रूप से दुबर्ल थे और वजन में भी ह के थे। आप को बीड़ी को बस मनोरंजन की वःतु मानते ह, परन्तु हािन माऽ आपको ही नहीं होती, उसका फल आपके िनद ष बच्चों को भी भोगना पड़ता है। और दःु ख की बात तो यह है िक आप अपने बच्चों के ःवाःथय के िलए, सुख के िलए कु छ भी नहीं सोचते।' (अनुबम)
  • 10. एक डॉक्टर का अनुभव िड बे में बैठे वे डॉक्टर महाराजौी की बाते यान से सुन रहे थे। वे बोल उठेः "तम्बाकू का सेवन करनेवाले और उससे बचे रहने वाले के शरीर का बल और आरो य में िकतना अन्तर होता है, इसे जानने के िलए मेरा अपना अनुभव सुिनयेः जब म डॉक्टरी पढ़ता था तब अपने मुप में हम कु ल 15 िव ाथ थे। मेरे िसवाये बाकी सब बीड़ी िसगरेट पीते थे। एक िदन हमारे ूोफे सर एक उपकरण लाये िजसके ारा िव ाथ के फे फडों में अिधक से अिधक िकतनी हवा भर सकती है इसका माप िनकालना था। बारी-बारी से ूत्येक व्यि ने शि के अनुसार गहरी ास लेकर उपकरण की नली में जोर से हवा फूँ की और ूत्येक िव ाथ ारा फूँ की गई हवा का माप नोट िकया। िव ािथर्यों में अिधक हवा फूँ कने वाला िव ाथ 2500 घन स.मी. हवा फूँ क सका था और कम से कम हवा फूँ कने वाले िव ाथ ने 1750 घन स.मी. हवा फूँ की थी। मेरे ारा फूँ की गयी हवा का माप 3500 घन सै.मी. था। अपने मुप मेंने सबसे अिधक हवा फूँ की थी। अब भी म 3600 घन स.मी. हवा फूँ क सकता हँू। इसका कारण यही है िक मने सारी िज़न्दगी बीड़ी-तम्बाकू नहीं िपया। यह देखकर हमारे ूोफे सर साहब खुश हो गये। उन्होंने सभी डॉक्टरों और िव ािथर्यों से कहा िक बीड़ी पीने से धुआँ धीरे-धीरे फे फड़ों में जमता जाता है। फलःवरूप फे फड़ों में हवा ठ क ूकार से नहीं भर सकते और र ठ क से शु नहीं हो पाता. तम्बाकू -बीड़ी के व्यसिनयों के थोड़ा पिरौम करते ही हाँफ चढ़ जाती है।" महाराजौी ने संवाद की डोर िफर से अपने हाथ में लेते हुए कहाः "भाइयों ! आपको तो अनुभव होगा िक आप में जो बीड़ी पीते ह उन्हे थोड़ी दूर ही दौड़ना पड़े तो वे हाँफ जाते ह। धूॆपान करने से इतनी अिधक हािन होती है, यह तो सच है, साथ ही साथ हमारे मत के अनुसार धािमर्क और मानिसक हािन भी होती है। यह भी जरा सुिनये। (अनुबम) तम्बाकू से धािमर्क हािन तम्बाकू माऽ शरीर को हािन नहीं पहँुचाती परन्तु इससे भी बढ़कर तो वह महा उ म मनुंय जन्म को न कर डालती है। कोई भी संत, महापु ष अथवा धािमर्क पुःतक बीड़ी पीने की इजाजत नहीं देते। गु नानक साहब ने कहा हैः "तम्बाकू इतनी अिधक अपिवऽ वःतु है िक मानव को दानव बना देती है। तम्बाकू के खेत में गाय तो क्या गधा भी नहीं जाता।" गु गोिबन्दिसंह जी ने कहा है िक "मनुंय 25 ासोच्छोवास में िजतने ॐ के जप करता है उससे िमलने वाला समःत फल एक बीड़ी पीने से न हो जाता है। तम्बाकू इतनी अपिवऽ वःतु है िक अन्य ूािणयों की तो बात ही क्या, गधा भी तम्बाकू नहीं खाता।
  • 11. यिद एक बीड़ी पीने से ूभु-भि का इतना अिधक फल न हो जाये तो रोज दस बीड़ी पीने वाले मनुंय की परलोक में क्या दशा होगी? वह अगर सारा िदन भि करे तो भी उसे भि का कोई लाभ िमलने वाला नहीं। तम्बाकू एक शैतानी नशा है। 'कु रान शरीफ' में अ लाह पाक िऽकोल रोशल के िसपारा में िलखा है िकः "शैतान ारा भड़काया इन्सान ऐसी नशीली चीजों का इःतेमाल करता है। ऐसी चीजों का उपयोग करने वाले मनुंय से अ लाह दूर रहता है। परन्तु शैतान उस आदमी से खुश रहता है क्योंिक यह काम शैतान का है और शैतान उस आदमी को जहन्नुम में ले जाता है।" गीता में भगवान ौीकृ ंण ने ऐसे तमोगुणी आहार को व यर् बताया है। इसिलए जो स वगुणी पु ष ह और क याण के मागर् पर चलने की इच्छा रखते ह, ऐसे महापु षों को तम्बाकू से दूर रहना आवँयक है। आहारशुि िववेक-बुि का आधार है। 'आहार जैसी डकार'। िववेक से ही सच्चे और खोटे की, लाभ और हािन की खबर िमलती है। परमात्मा की चेतन सृि में सबसे उ म ूाणी मनुंय है क्योंिक मनुंय में िववेक है। िववेक बुि को शु और पिवऽ रखने के िलए तमोगुणी वःतुओं से दूर रहना बहुत ही आवँयक है। अन्यथा, मनुंय गलत मागर् पर जाकर अपने अमू य मनुंय जन्म को िनंफल करके भटकता है। हे स जनों ! यह पिवऽ मुख के वल ूभु का जाप करने के िलए ही है। पिवऽ मुख को तम्बाकू की दुगर्न्ध से अपिवऽ न करो। याद रखो िक एक िदन मरने के बाद अपने-अपने कम का िहसाब अवँय देना पड़ेगा। उस समय क्या जवाब दोगे? तो िफर िकसिलए ऐसी आत्मघातक, अशु और आ याित्मक पतनकारी वःतुओं का त्याग करना चािहए? तन, मन और धन की हािन करे, ऐसी वःतुओं को छू ने से भी िहचकना चािहए। हे ूभु के प्यारे बच्चों ! जरा सोचो। यह मू यवान मनुंय बारंबार ूा नहीं होता। इसका िमलना सरल नहीं है। अब जो िमला है उसे क्षिणक मोह के िलए क्यों दूिषत करते हो? िकसिलए आत्मा का अधःपतन करते हो? बीड़ी- तम्बाकू छोड़ना तो कोई किठन नहीं। तम्बाकू आपके जीवन को बबार्द करने वाली चीज़ है। उसके िबना आपको जरा भी नुकसान नहीं होगा। म आपको अिधक क्या समझाऊँ ? परन्तु याद रखना, ूत्येक ूकार के अन्न को चक्की में िपसना पड़ता है। इसी तरह तुम्हें भी एक िदन मौत के मुँह में जाना पड़ेगा। जैसे पके हुए अनार को चूहा खा जाता है इसी ूकार काल रूपी चूहा इस संसार के ूत्येक पदाथर् का भक्षण करता है। जैसे चाहे िजतना घी डालो तथािप अि न संतु नहीं होती उसी ूकार अनन्त काल से समम िव का भक्षण करता हुआ काल अनेक ूािणयों का और आपका भक्षण करके भी संतु नहीं होगा। इस संसार के समःत पक्षी, ूाणी, मनुंय और आप भी काल के आहार ह। बाग- बगीचे, नदी-नाले और अन्य सब जड़, चेतन, ःथावर, जंगम पदाथर् उसके मुख में ह। कोई पदाथर् सदैव रहने वाला नहीं है। सभी दैत्य, देवता, यक्ष, गन्धवर्, अि न, वायु उसी से न होते ह। जैसे िदन के बाद रात िनि त है वैसे ही आपकी मौत अवँय होगी। देवताओं का िनवास ःथान
  • 12. (सुमे पवर्त) भी न होगा। इतने िवशाल पृथ्वी और समुि को भी काल एक िदन िनगल जायेगा। राक्षस और राक्षसािधपित भी काल से न बच सके । िकतने ही बड़े-बड़े यो ा और बहादुर पहलवान इस पृथ्वी पर आये, अन्त समय आने पर उन्हें यह दुिनया छोड़नी पड़ी। बड़े-बड़े राजा और ूभावशाली सॆाट भी रह न सके । और यह जो अनंत आकाश है, यह भी आगामी काल के चक्कर में आ जायेगा तो िफर आपका क्या भरोसा? सभी काल के मुख में ही ह। कु छ न रह पायेगा। समय आते ही सब चला जाता है। आप भी जाओगे ही, तो िफर आपका अहंकार िकस पर है? िकसिलए तम्बाकू जैसी अपिवऽ वःतु का सेवन करते हो? िकसका अिभमान और अहं कर रहे हो? आपकी भी बारी आने वाली है। ठहर जाओ, थोड़ा ही समय बाकी है। अरे, अभी आपकी बारी आई िक आई। आपकी देह िगर पड़ेगी। आपका शरीर अिनत्य और िब कु ल िमथ्या है। अतः उसका नाम अवँय होगा। जब संसार का नाश सदैव देखने में आता है तब ऐसे संसार पर भरोस रखना आपकी मूखर्ता नहीं तो और क्या है? काल ूत्यक्ष रूप में तो िकसी से पहचाना नहीं जाता। परन्तु िमनट, घंटे, िदन, महीने और वषर् बीतने से अच्छ तरह जाना जा सकता है। याद रखो, काल बहुत ही िन ुर है। िकसी पर दया नहीं करता। सभी जीव उससे डरकर िनबर्ल हो जाते ह। उसके ताप के आगे िटकने की कोई िहम्मत नहीं कर सकता। आप भी अपनी िहम्मत हार जायेंगे। काल की कठोरता से सब डरते ह जैसे बच्चा िम टी के घर का नाश करता है। इससे िकसी पर भी भरोसा रखना आपकी मूखर्ता है। अि न के समान काल भी छोटापन-बड़प्पन नहीं देखता। पता नहीं िक पहले िकसको खा जाये। हो सकता है िक आज आप ह, कल आप न भी हों। (अनुबम) भाईयो ! चेत जाओ... याद रखो िक एक िदन आपकी मौत अवँय आयेगी। कब आयेगी इसकी खबर नहीं। अभी होशोहवास सिहत होिशयार बनकर बैठे हो परन्तु आने वाला क्षण कदािचत आपकी मौत का समय हो। अभी तो काम में आपको एक िमनट भी अवकाश नहीं िमलता और िफर तो आपके सब काम ऐसे ही पड़े रह जायेंगे। इस समय तो शरीर के आराम के िलए नमर् ग ों पर सो जाते हो, सुन्दर मकानों में रहते हो, तम्बाकू जैसी अशु वःतुओं का सेवन करते हो, बीड़ी-िसगरेट पीने के अिभमान में भरकर नाक में से और मुँह में धुएँ के छ ले िनकालते हो, और दुिनयाँ की अपिवऽ लीलाएँ रचते हो। परन्तु जब काल के यमदूत आयेंगे तब हाय-हाय पुकारते चले जाओगे। आपके अपने सगे सम्बन्धी, माता-िपता, भाई-बहन, पुऽ-पुऽी, िमऽ-दोःत आपकी सहाताथर् नहीं आयेंगे और कोई भी आपके साथ नहीं चलेगा। आपको अके ले ही जाना पड़ेगा। उस समय खुद आपकी ी भी भूत...भूत... कहकर आपसे दूर भागेगी। आपके सगे सम्बन्धी आ ा देंगे िकः "अब इसे यहाँ से बाहर िनकालो, और ज दी से बाहर िनकालो।" आपके मकान, धन-
  • 13. दौलत, बंगले, जमीन िजतना भी होगा वह दूसरों का हो जायेगा और आप उस समय एक सुनसान जंगल में िग , कु ों और गीदड़ों से िघरे भयंकर शमशान में िब कु ल न न अवःथा में खुली जमीन पर पड़े होंगे। यह आपका सुन्दर शरीर जलाकर खाक कर िदया जायेगा या िफर जमीन में गहरे दफना िदया जायेगा। आपके सब मनोरथ मन में ही रह जायेंगे। आपकी सारी अकड़ िनकल जायेगी। आपकी ये हठ ली, बोधी और जोशीली आँखें सदा के िलए बन्द हो जायेंगी। िफर पछताने के िसवा कु छ हाथ न लगेगा। इस शरीर से छू टकर जब परलोक में जायेंगे और जब यहाँ िकये हुए कम का भयंकर फल सामने आयेगा तब आप डर जायेंगे। आपके पाप ूकट होंगे। उनके पिरणाम माऽ सुनकर आप काँप उठेंगे और बेहोश होने लगेंगे। यहाँ के मनोरंजन, लीलाएँ और चतुराईयाँ, बीड़ी-िसगरेट के चःके और अपिवऽ कम के फल आपको भोगने ही पड़ेंगे। टेढ़े राःते आपको ही देखने पड़ेंगे। 84 लाख फे रों में आप आ ही जायेंगे और नीच योिनयों में चीखेंगे, िच लायेंगे, दःु खी होंगे। उस समय कौन आपका सहायक होगा? इसिलए अभी सोिचए और चेत जाइये। अपना ऐसा अमू य जन्म बरबाद न कीिजए। (अनुबम) काल के जाल से कौन मु है? महाराजौी के बातें यान से सुन रहे यािऽयों में से एक युवक ने ू िकयाः "महाराजौी ! कोई भी व्यसनी काल से बच नहीं सकता तब क्या जो बीड़ी-तम्बाकू , दारू, भाँग, गाँजा, चरस नहीं पीते वे सब बच जायेंगे? व्यसनी मरने वाले ह तो िनव्यर्सनी भी तो मरेंगे ही। काल से कौन बच सकता है?" महाराजौी ने मंद हाःय से युवक के ू को सराहते हुए कहाः "भाई ! काल से के वल वही बच सकता है जो ूभु के नाम में लीन हो जाता है। ऐसे सत्पु षों के पास नामरूपी डंडा रहता है िजससे काल के दूत भी घबराते ह। तुझे पता होगा िक भ कबीर कै से नामरूपी डंडा लेकर यमदूतों के पीछे पड़े थे। ऐसे महापु ष अन्य िकसी पर दया ि करें तो वह भी काल की पीड़ा से छू ट जाता है और जो पु ष ऐसे महापु षों के उपदेशानुसार बतर्ता है, वह भी भी भयानक काल से आजाद हो जाता है। मौज-शौक, बीड़ी- िसगरेट, तम्बाकू आिद में फँ से हो और ऐसा समढझते हो िक कोई महापु ष आप पर दया ि करेंगे? कदािप नहीं। आप अपने हाथों अपने िलए ही खाई खोद रहे हो। अशु , अधम तम्बाकू , बीड़ी, िसगरेट आपको संतों के चरणों में ले जायेंगी? कदािप नहीं। ऐसी अपिवऽ खराब वःतुएँ तो आपको सत्य से बहुत दूर ले जायेंगी। ऐसा करके आप न के वल यहाँ ही दःु खी होंगे परन्तु आगे चलकर परलोक में भी क भोगेंगे। मौज-मःती में आकर आज तम्बाकू , बीड़ी, िसगरेट को आप अपना साक्षी बना बैठे ह।
  • 14. यह राक्षस तम्बाकू आपको और आपके शरीर को बबार्द कर रहा है। इसिलए अपनी आँखें खोलो तो आपको ही लाभ है। परन्तु याद रखना, कभी भूलना नहीं, जब जूते खाने का समय आयेगा तब आपको अके ले ही सहना होगा। अिधक क्या कहँू? जैसी आपकी इच्छा हो वैसा ही करें। बकरा हिर घास खाता है और बाद में कसाई की छु री के नीचे आता है। देखना, कहीं आपका भी यही हाल न हो िक आप इस जगत के नाशवान पदाथ में भूलक, कामनाओं में फँ सकर काल की छु री के नीचे आ जायें। इसीिलए हमारी सलाह है िक अपना ऐसा अमू य मनुंयजन मु ठ भर चनों के लोभ से मोिहत होकर बरबाद न करें।" ऐसा सुनकर जो युवक छोकर िड बे में बैठे थे उनमें से एक ने कहाः "महाराज ! म कान पकड़कर सौगन्ध खाता हँू िक म िफर कभी तम्बाकू का उपयोग न करूँ गा। आपका उपदेश सुनकर मेरे शरीर के र गटे खड़े हो गये ह। अब कभी तम्बाकू का इःतेमाल नहीं करूँ गा।" महाराजौी ने कहाः "बेटा ! मन चंचल है। यह पलट न जाये। इसीिलए अभी उठ और बीड़ी-िसगरेट जो कु छ तेरे पास हो, उसे तोड़कर फें क दे तािक मुझे िव ास हो जाये िक अब तू तम्बाकू , बीड़ी, िसगरेट का उपोग नहीं करेगा। यह व्यसन छोड़ने में अके ले तेरा ही क याण नहीं, तेरे बच्चों का भी क याण है। चलो, अच्छे काम में देर कै सी? शुभःय शीयम।" "अच्छा महाराज !" कहकर युवक ने जेब से बीड़ी, िसगार, मािचस िनकालकर फें क िदया। उसने भावपूवर्क महाराजौी का चरणःपशर् िकया। िड बे में बैठे अन्य िकतने ही लोगों ने भी अपनी जेबें बीड़ी, िसगरेट से खाली करके महाराज को ूणाम करते हुए भिवंय में कभी धूॆपान करने की शपथ ली। डॉक्टर ने भी भावभीनी श दों में कहाः "महाराज ! म आपका उपदेश सुनकर बहुत ही ूसन्न हुआ हँू। आज की शेनयाऽा मुझे सदैव याद रहेगी। खूब धन्यवाद ! धन्यवाद ! धन्यवाद ! रेलगाड़ी के छोटे से िड बे में बैठे हुए व्यसनमुि से हलके हुए दयवाले िकतने ही मानवों को ले... भक्...छु क्....भक्...छु क्...करती शेन आगे बढ़ती रही। .ये ेतव धारी संत थे परम पू य सदगु ःवामी ौी लीलाशाहजी महाराज। धन्य ह उन संत महापु ष को और धन्य ह उनके पावन चरणों में पहँुचने वाले भा यशाली जीवों को....!!! (अनुबम) बीड़ी पीने वालों का हाल बीड़ी पीने वालों ने कमाल कर िदया। पड़ोसी का िबःतर जला के धर िदया।। गन्दगी पसन्द हो तो जदार् खाना सीख लें। भीख गर माँगी नहीं तो बीड़ी पीना सीख लें।।
  • 15. बीड़ी पीने की िमऽो ! आदत जब पड़ जायेगी। ना होने पर माँगते जरा शमर् ना हीं आयेगी।। माँगने से मरना भला यह एक सच्चा लेखा है। िकतने लखपितयों को मािचस बीड़ी माँगते देखा है।। एक भाई तो ऐसे ह जो िबना नशे के जीते ह। पर कई भाई देखो तो पाखाने में बीड़ी पीते ह।। बीड़ी पीने से भी हमने देखा धन्धा खोटा है। िसगरेट पीनेवालों पे मािलश का देखा टोटा है। ताज पनामा के वन्डर पीते ह कई सालों से। वो मािचस माँगते रहते ह यूँ बीड़ी पीने वालों से।। कह दो अपने बच्चों से ना बीड़ी का शौक लगाये। ये पढ़े िलखे पैसे वालों से भी बीड़ी भीख मँगाये।। इन सबसे यादा मजा यार ! देखो अफीम के खाने में। दो-दो घ टे मौज उड़ावे बैठे रहे पाखाने में।। परेशान होना पड़ता घर से बाहर जाने में। लगी थूकने चू हे में औरत भी जदार् खाने से।। (अनुबम) चाय-कॉफी ने िकया हुआ सवर्नाश ःवाःथ्य पर भयानक कु ठाराघात आज हमारे देश में चाय-कॉफी का इःतेमाल िदन-ूितिदन बढ़ रहा है। अबालवृ , ी- पु ष, गरीब-धनवान आिद कोई भी व्यि चाय-कॉफी के भयंकर फं दे से मु नहीं है। लोग बोलते ह िक चाय-कॉफी शरीर में तथा िदमाग में ःफू ितर् देती है। यह उनका ॅम है। वाःतव में चाय-कॉफी शरीर के िलए हािनकारक ह। अनुभवी डॉक्टरों के ूयोगों से िस हुआ है िक चाय-कॉफी से नींद उड़ जाती है, पाचनशि मन्द हो जाती है, भूख मर जाती है, िदमाग सूखने लगता है, गुदा और वीयार्ँय ढीले पड़ जाते ह। डायिबटीज़ जैसे रोग होते ह। िदमाग सूखने से उड़ जाने वाली नींद के कारण आभािसत कृ िऽम ःफू ितर् को ःफू ितर् मान लेना, यह बड़ी गलती है। चाय-कॉफी के िवनाशकारी व्यसन में फँ से हुए लोग ःफू ितर् का बहाना बनाकर हारे हुए जुआरी की तरह व्यसन में अिधकािधक गहरे डूबते जाते ह वे लोग शरीर, मन, िदमाग और पसीने की कमाई को व्यथर् गँवा देते ह और भयंकर व्यािधयों के िशकार बन जाते ह।
  • 16. यिद िकसी को चाय-कॉफी का व्यसन छू टता न हो, िकसी कारणवशात ् चाय-कॉफी जैसे पेय की आवँयकता महसूस होती हो तो उससे भी अिधक रूिचकर और लाभूद एक पेय (क्वाथ) बनाने की िविध इस ूकार हैः आयुविदक चाय साममीः गुलबनप्शा 25 माम। छाया में सुखाये हुए तुलसी के प े 25 माम। तज 25 माम। छोटी इलायची 12 माम। स फ 12 माम। ॄा ी के सूखे प े 12 माम। जेठ मध िछली हुई 12 माम। िविधः उपरो ूत्येक वःतु को अलग-अलग कू टकर चूणर् करके िमौण कर लें। जब चाय-कॉफी पीने की आवँयकता महसूस हो तब िमौण में से 5-6 माम चूणर् लेकर 400 माम पानी में उबालें। जब आधा पानी बाकी रहे तब नीचे उतारकर छान लें। उसमें दूध-खांड िमलाकर धीरे-धीर िपयें। लाभः इस पेय को लेने से मिःतंक में शि आती है। शरीर में ःफू ितर् आती है। भूख बढ़ती है। पाचनिबया वेगवती बनती है। सद , बलगम, खाँसी, दमा, ास, कफजन्य वर और न्यूमोिनया जैसे रोग होने से कते ह। (अनुबम) मादक पदाथर् मनुंय जाित को अिधकािधक हािन यिद िकसी ने की हो, तो वे ह मादक पदाथर्। उनसे मनुंय के धन, आरो यता और जीवन का नाश होता है। मादक पदाथ का सेवन करने से भावी सन्तान िदनोंिदन िनबर्ल तथा िनःतेज बनती जाती है। भारत में लाखों लोगों को भरपेट अन्न नहीं िमलता। भारत माता के िकते ही लाल अन्न के अभाव में अकाल मृत्यु को ूा हो जाते ह। जहाँ भारत की माताएँ और बहनें रोटी के टुकड़े के िलए लाचार हो जाती ह वहाँ मादक िव्यों का ूचार हो.... इससे अिधक दुभार् य की बात और क्या हो सकती है। मादक पदाथ ने देश-िवदेश के लोगों को अपार नुक्सान पहँुचाया है। अित ूाचीनकाल से गौरवशाली भारतवषर् में आज मादक पदाथ का ूचार-ूसार बहुत भयंकर है। आठ-दस वषर् के बच्चे भी बीड़ी-िसगरेट पीते हुए िदखाई देते ह। यह ँय ममार्न्तक तथा शमर्नाक है। छोटी उॆ से ही जो बच्चे मादक पदाथर्, चाय, बीड़ी, मिदरा, गाँजा, तम्बाकू जैसी चीजों का सेवन करते ह वे िफर युवान होने के बजाय बचपन के बाद सीधे वृ त्व को ूा होते ह। ऐसे दुबर्ल बच्चे देश की क्या सेवा करेंगे? वे तो अपनी जीवनयाऽा भी ठ क से नहीं चला पायेंगे।
  • 17. भारत जैसे गरीब देश में ूितिदन मजदूरी करके जीिवका चलाने वाले लोग अ प आय का अिधकाँश तो शराब या गाँजे में खचर् कर देते डालते ह। तो िफर वे अपनी बीवी बच्चों का पालन िकस ूकार कर पायेंगे? मादक पदाथ का सेवन करने वाले लोग जीते जी अपने ही खचर् से अपनी अथ बना रहे ह। नशेबाज आदमी अिधक समय जी नहीं सकता । नशीली चीजों का इःतेमाल करने की आदत बहुत ही खराब है। दुबर्ल मन के लोगों को यह आदत छोड़ना मुिँकल है। यह महारोग समय पाकर असा य हो जाता है। (अनुबम) दारू मादक पदाथ में दारू सबसे अिधक भयानक है। इससे लाखों घर बबार्द हुए ह। भारत भर में दारूबन्दी के िलए िवःतृत ःतर पर ूय हो रहे ह। अमेिरका और रूस जैसे देशों में भी दारू का इःतेमाल कम होता जा रहा है। दारू में एक ूकार का िवष होता है। उसमें कु छ अनुपात में अ कोहल होता है। िजस कक्षा का दारू होता है उसमें उतनी माऽा में िवष भी होता है। वाइन में 10 ूितशत, बीयर जो साधारण कक्षा दारू माना जाता है उसमें 30 ूितशत, िव्हःकी तथा ॄान्डी में 40 से 50 ूितशत तक अथार्त आधा िहःसा अ कोहल होता है। आ यर् की बात यह है िक िजस दारू में अिधक माऽा में अ कोहल होता है उतना वह अिधक अच्छ िकःम का दारू माना जाता है, क्योंिक उससे अिधक नशा उत्पन्न होता है। सुिव यात डॉक्टर डॉक का अिभूाय है िक अ कोहल एक ूकार का सूआम िवष है जो क्षण माऽ में सारे शरीर में फै ल जाता है। र , नािड़यों तथा िदमाग के काय में िव न डालता है। शरीर के कु छ अंगों सूजन आती है। तदुपरांत, शरीर के िविवध गोलकों (चबों) को िबगाड़ देता है। कई बार वह सारे शरीर को बेकार बना देता है। कभी पक्षाघात भी हो जाता है। थोड़ा सा िवष खाने से मृत्यु हो जाती है। दारू के रूप में हर रोज िवषपान िकया जाये तो िकतनी हािन होती है, इसका िवचार करना चािहए। कु छ डॉक्टरों ने शरािबयों के शरीर को चीरकर देखा है िक उसके सब अंग िवषा हो जाते ह। आँतें ूायः सड़ जाती ह। िदमाग कमजोर हो जाता है। र की नािडयाँ आवँयकता से अिधक चौड़ी हो जाती ह। िदमाग शरीर का राजा है। उसके संचालन में खाना-पीना, उठना बैठना, चलना िफरना जैसी िबयाओं में मन्दता आ जाती है। इस ूकार सारा शरीर ूायः बेकार हो जाता है। आदमी जब दारू पीता है तब िदमाग उसके िनयन्ऽण में नहीं रहता। कु छ का कु छ बोलने लगता है। लड़खड़ाता है। उसके मुँह से खराब दुगर्न्ध िनकलती है। वह राःते में कहीं भी िगर पड़ता है। इस ूकार नशे का बुरा ूभाव िदमाग पर पड़ता है। िदमाग की संचालन शि धीरे-धीरे
  • 18. न होती जाती है। कु छ लोग पागल बन जाते ह। कभी अकाल मृत्यु का िशकार हो जाते ह। इं लड, जमर्नी, अमेिरका आिद देशों में जहाँ अिधक माऽा में दारू िपया जाता है वहाँ के डॉक्टरों का अिभूाय है िक अिधकतर रोग दारू पीने वालों को सताते ह। प्लेिटन महोदय इस िवषय पर िलखते ह िक शरीर के के न्िःथान पर अ कोहल की बहुत भयानक असर पड़ती है। इसी कारण से दारू पीने वालों में कई लोग पागल हो जाते ह। शरािबयों के बच्चे ूायः मूखर्ता, पागलपन, पक्षाघात, क्षय आिद रोगों के िशकार बनते ह। दारू तथा मांसाहार में होनेवाली अशांित, उ ेग और भयंकर रोगों को िवदेशी लोग अब समझने लगे ह। करीब पाँच लाख लोगों ने दारू, मांस जैसे आसुरी आहार का त्याग करके भारतीय शाकाहारी व्यंजन लेना शु िकया है। शराबी लोग ःवयं तो डूबते ह साथ ही साथ अपने बच्चों को भी डुबोते ह। आगे चलकर उपरो महोदय कहते ह िक दारू पीने वाले लोग अत्यन्त दुबर्ल होते ह। ऐसे लोगों को रोग अिधकािधक परेशान करते ह। दारू के शौकीन लोग कहते ह िक दारू पीने से शरीर में शि , ःफू ितर् और उ ेजना आती है। परन्तु उनका यह तकर् िब कु ल असंगत है। थोड़ी देर के िलए कु छ उ ेजना आती है लेिकन अन्त में दुंपिरणाम भुगतने पड़ते ह। दारू पीने वालों की ि यों की क पना करो। उनको िकतने दःु ख सहन करना पड़ता है। शराबी लोग अपनी प ी के साथ बू रता पूणर् बतार्व करते ह। दारू पीने वाला मनुंय िमटकर राक्षस बन जाता है। वह राक्षस भी शि एवं तेज से रिहत। उसके बच्चे भी कई ूकार से िनराशा महसूस करते ह। सारा पिरवार पूणर्तया परेशान होता है। दारू पीने वालों की इ जत समाज में कम होती है। ये लोग भि , योग तथा आत्म ान के मागर् पर नहीं चल सकते। आदमी यों- यों अिधक दारू पीता है त्यों-त्यों अिधकािधक कमजोर बनता है। पा ात्य िशक्षा के रंग में हुए लोग कई बार मानते ह िक दारू का थोड़ा इःतेमाल आवँयक और लाभूद है। वे अपने आपको सुधरे हुए मानते ह। लेिकन यह उनकी ॅांित है। डॉ. टी.एल. िनक स िलखते ह- "जीवन के िलए िकसी भी ूकार और िकसी भी माऽा में अ कोहल की आवँयकता नहीं है। दारू से कोई भी लाभ होना असंभव है। दारू से नशा उत्पन्न होता है लेिकन साथ ही साथ अनेक रोग भी पैदा होते ह। जो लोग सयाने ह और सोच समझ सकते ह, वे लोग मादक पदाथ से दूर रहते ह। भगवान ने मनुंय को बुि दी है, इससे बुि पूवर्क सोचकर उसे दारू से दूर रहना चािहए।" जीव िव ान के ाताओं का कहना है िक शरािबयों के र में अ कोहल िमल जाता है अतः उसके बच्चे को आँख का कै न्सर होने की संभावना है। दस पीढ़ी तक की कोई भी संतान इसका िशकार हो सकती है। शराबी अपनी खाना-खराबी तो करता ही है, दस पीिढ़यों के िलए भी िवनाश को आमंिऽत करता है।
  • 19. बोतल का दारू दस पीढ़ी तक िवनाशकारी ूभाव रखता है तो राम नाम की प्यािलयाँ इक्कीस पीिढ़यों को पार लगाने का सामथ्यर् रखे, यह ःवाभािवक है। जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात बीती सुबह को उतर जायेगी। तू हिर रस की प्यािलयाँ पी ले तेरी सारी िज़न्दगी सुधर जाएगी।। डायोिजनीज को उनके िमऽों ने महँगे शराब का जाम भर िदया। डायोिजनीज ने कचरापेटी में डाल िदया। िमऽों ने कहाः "इतनी कीमती शराब आपने िबगाड़ दी?" "तुम क्या कर रहे हो?" डायोिजनीज ने पूछा। "हम पी रहे ह।" जवाब िमला। "मने जो चीज कचरापेटी में उड़ेली वही चीज तुम अपने मुँह में उड़ेलकर अपना िवनाश कर रहे हो। मने तो शराब ही िबगाड़ी लेिकन तुम शराब और जीवन दोनों िबगाड़ रहे हो।" (अनुबम) महानुभावों के वचन "म म पान को चोरी-डकै ती से, दुराचार व वेँयावृि से भी यादा भयंकर पाप-चे ा मानता हँू। बू र व्यि यों से भी शराबी यादा बू र हो सकता है लेिकन शराबी िनःतेज बू र है।" महात्मा गाँधी "जो पु ष नशीले पदाथर् का सेवन करता है वह घोर पाप करता है।" भगवान बु "अ लाह ने लानत फरमाई है शराब पर, पीने और िपलाने वाले पर, बेचने और खरीदने वाले पर और िकसी भी ूकार सहयोग देने वाले पर।" हजरत मुहम्मद पैगम्बर "More poisonous than snake. Alcohol ruins one physically, morally, intellectually and economically." Mahatma Gandhi (अनुबम) आठ पापों का घड़ा एक बार किव कािलदास बाजार में घूमने िनकले। एक ी घड़ा और कु छ कटोिरयाँ लेकर बैठ थी माहकों के इन्तजार में। किवराज की कौतूहल हुआ िक यह मिहला क्या बेचती है ! पास जाकर पूछाः
  • 20. "बहन ! तुम क्या बेचती हो?" "म पाप बेचती हँू। म लोगों से ःवयं कहती हँू िक मेरे पास पाप है, मज हो तो ले लो। िफर भी लोग चाहत पूवर्क पाप ले जाते ह।" मिहला ने कु छ अजीब सी बात कही। कािलदास उलझन में पड़ गये। पूछाः "घड़े में कोई पाप होता है?" "हाँ... हाँ.. होता है, जरूर होता है। देखो जी, मेरे इस घड़े में आठ पाप भरे हुए ह- बुि नाश, पागलपन, लड़ाई-झगड़े, बेहोशी, िववेक का नाश, सदगुण का नाश, सुखों का अन्त और नकर् में ले जाने वाले तमाम दुंकृ त्य।" "अरे बहन ! इतने सारे पाप बताती है तो आिखर है क्या तेरे घड़े में? ःप ता से बता तो कु छ समझ में आवे।" कािलदास की उत्सुकता बढ़ रही थी। वह ी बोलीः 'शराब ! शराब !! शराब!!! यह शराब ही उन सब पापों की जननी है। जो शराब पीता है वह उन आठों पापों का िशकार बनता है।" कािलदास उस मिहला की चतुराई पर खुश हो गये। (अनुबम) व्यसनों से मुि िकस ूकार? व्यसनों से होने वाली हािनयों के सम्बन्ध में िवचार कर अनेकों लोग व्यसनों के चुंगल से मु होने की इच्छा तो वाःतव में करते ह परन्तु मु नहीं हो सकते। व्यसिनयों का संक पबल अत्यन्त क्षीण हो जाने के कारण वे िकसी भी िन य पर अटल नहीं रह सकते। िजस ूकार कीचड़ में फँ सा हाथी कीचड़ से बाहर िनकलने का ूयास करे परन्तु अपने ही भार के कारण वह यों- यों अिधक ूय करता जाता है त्यों-त्यों कीचड़ में अिधकािधक गहरा फँ सता जाता है उसी ूकार व्यसनी भी व्यसनों में अिधकािधक फँ सता जाता है। ऐसी पिरिःथित में व्यसनों से मुि िकस ूकार ूा हो? यिद अपने पास संक पबल न हो तो िजसके पास अपूवर् संक पबल हो उसका सहारा लेना चािहए। संत, महापु ष, आत्म ानी महात्मा ऐसे सामथ्यर् के अक्षय भंडार होते ह। उनकी शरण जाने पर, उनकी मीठ नज़र की एकाध िकरण िमलने पर ूय करने से असा य लगता कायर् सरलता से सध जाता है। व्यसनों के िशकार िकतने ही लोग यहाँ संत ौी आसाराम जी आौम में आकर व्यसनों से मु हुए ह। पू य ःवामी ज के पितत पावन सािन्न य में उन्हें नवजीवन िमला है और सच्चे जीवन की ओर ूयाण कर सुख शांित ूा कर रहे ह। अिप चेत ् सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्यः सम्यगव्यविसतो िह सः।।
  • 21. यिद कोई अित दुराचारी भी अनन्य भाव से मेरा भ होकर मुझे िनरंतर भजता है तो उसे साधु ही मािनये। कारण िक वह यथाथर् िन यवाला है।" ौीम भगवत्गीता के इस ोक को यहाँ अनेकों के जीवन में चिरताथर् होते देखा है। व्यसनों की व्यािध से क्षीण बने अनेक जीवों को 'िक्षूं भवित धमार्त्मा श चछािन्तं िनगच्छित' थोड़े समय में ही धमार्त्मा होते देखा है और शा त शािन्त के मागर् पर चलते देखा है। गुजरात रा य के नशाबंदी िवभाग के मंऽी ौी हिरिसंहभाई चावड़ा भी िकतनी ही बार आौम में आ चुके ह। उन्होंने आौम ारा रो रही इस व्यसनमुि और जीवनोत्थान कायर् की भारी ूशंसा करते हुए कहा िकः "जो काम सरकारी ःतर पर बहुत पैसे खचर् करके , अलग-अलग कानून बना कर करने पर भी सरकार सफल नहीं होती वह महाराजौी िनराले ूकार से, िनतान्त मौिलक ःतर पर कर रहे ह। यह वाःतव में ःतुत्य है।" आौम में आने वाले ऐसे िकतने ही लोग ह िजन्होंने पू यौी के आशीवार्द से सदा के िलए व्यसनों से मुि पाकर अपना जीवन ःवच्छ और सुख-शािन्त भरा बनाया है। ऐसे लोगों के कु छ उदाहरण यहाँ ूःतुत ह- (अनुबम) यह दःु ख शाप था या वरदान? अमदावाद के एक भाई दयालदास बहुत दारू पीते थे। एक बार वे ःवामी जी के दशर्न करने आये। वे आये थे तो बड़ी अकड़ में परन्तु संत दशर्न ने न जाने क्या चमत्कार कर िदया िक उन्होंने ःवामी जी को वचन दे िदयाः "आप कहते ह तो अब दारू नहीं पीऊँ गा।" थोड़े िदन प ात ही उनके िमऽ ने उनके पास खूब बिढ़या दारू की एक बोतल भेजी। अपनी पुरानी आदत के अनुसार उन्होंने बोतल मुँह से लगाई... और जो अनुभव हुआ उसे अनेकों सत्संगी भ ों के आगे इस ूकार कहाः "खबरदार ! पीना नहीं....... !" कहीं से आवाज आई मने आसपास देखा, कोई भी िदखाई न िदया। मने िफर बोतल मुँह से लगाई तो तुरन्त िफर वही आवाज सुनाई दी। समझ में नहीं आता था िक यह आवाज कहाँ से आती थी। बाहर से आती थी या अन्दर से? मेरे कान सुनते थे या मन सुनता था? मेरा ॅम तो नहीं है? परन्तु क्या करूँ ? इतना बिढ़या माल....! भले थोड़ी ही सही परन्तु आज तो पी लूँ। मने बोतल मुँह से लगाई। इस बार मुझे लगा िक मानो अन्दर से पूरा दय अकु लाकर कर कह रहा हैः "मत पीना..... देख.... ! पीछे पछतायेगा।" परंतु िकतने ही घूँच गले से नीचे उतर ही गये। अब मुझे भान होने लगा िकः नहीं, नहीं, यह मेरा ॅम न था परन्तु ःवामी जी की ही आवाज थी, चाहे जहाँ से भी आई हो।

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