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भारतीय राजव्यवस्था एवं अभभशासन
भारत का संवैधाननक इनतहास
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•बायत भें ब्रिटिश 1600 ई. भें ईस्ि इंडिमा कऩनी क रूऩ
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प्राजप्त तक अनवयत रूऩ से जायी यहा ।
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1784 का वऩट्स इंडिया एक्
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अधधननयम की ववशेषताएं
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1853 का चा ट र अधधननयम
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1793 से 1853 क दौयान ब्रिटिश संसद द्वाया ऩारयत ककए गए चािट य
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इसने प्रथभ फाय बायतीम कद्रीम ववधान ऩरयषद भें
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सभाप्त कय बायत भें शासन की द्वैध प्रणारी सभाप्त कय
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•इस कानन क तहत बायत सधचव की ऩरयषद का गठन
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ककमा गमा. जो एक यनगलभत यनकाम थी औय जजसे बायत
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1861, 1892 और 1909 क ऩररषद
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अधधननयम
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•1857 की भहान क्रांयत क फाद ब्रिटिश सयकाय ने भहसूस
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अधधक जानकायी क लरए महां जक्रक कयें
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Polity topic-bharat-ka-samvaodhanik-itihas-1a

Polity topic-bharat-ka-samvaodhanik-itihas-1a
Published on: Mar 4, 2016
Published in: Business      
Source: www.slideshare.net


Transcripts - Polity topic-bharat-ka-samvaodhanik-itihas-1a

  • 1. www.upscportal.com भारतीय राजव्यवस्था एवं अभभशासन भारत का संवैधाननक इनतहास © 2013 UPSCPORTAL .COM
  • 2. www.upscportal.com •बायत भें ब्रिटिश 1600 ई. भें ईस्ि इंडिमा कऩनी क रूऩ ं े भें , व्माऩाय कयने आए। •भहायानी एलरजाफेथ प्रथभ क चािट य द्वाया उन्हें बायत भें े व्माऩाय कयने क ववस्तत अधधकाय प्राप्त थे। कऩनी, े ं ृ जजसक कामट अबी तक लसप व्माऩारयक कामों तक ही े ट सीलभत थे, ने 1765 भें फंगार, ब्रफहाय औय उड़ीसा क े दीवानी (अथाटत याजस्व एवं दीवानी न्माम क अधधकाय) े अधधकाय प्राप्त कय लरए। •1858 भें , जससऩाही ववद्रोहश ् क ऩरयणाभस्वरूऩ ब्रिटिश े ताज ;ब्तवूदद्ध ने बायत क शासन का उत्तयदायमत्व े प्रत्मऺत् अऩने हाथों भें रे लरमा। © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 3. www.upscportal.com •मह शासन 15 अगस्त, 1947 भें बायत की स्वतंत्रता प्राजप्त तक अनवयत रूऩ से जायी यहा । •स्वतंत्रता लभरने क साथ ही बायत भें एक संववधान की े आवसमकता भहसस हुई। ू •ब्रिटिश शालसत बायत भें सयकाय औय प्रशासन की ववधधक रूऩये खा यनलभटत की गई। इन घिनाओं ने हभाये संववधान औय याजतंत्र ऩय गहया प्रबाव छोड़ा। इन घिनाओं का क्रभवाय व्मौया यनम्नानसाय है ु © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 4. 1773 का रै गऱेट ग एक् ं ु www.upscportal.com इस अधधयनमभ का अत्मधधक संवैधायनक भहत्व है , मथा् बायत भें ईस्ि इंडिमा कऩनी क कामों को यनमलभत औय ं े यनमंब्रत्रत कयने की टदशा भें ब्रिटिश सयकाय द्वाया उठामा गमा मह ऩहरा कदभ था, इसक द्वाया ऩहरी फाय कऩनी क प्रशासयनक औय े ं े याजनैयतक कामों को भान्मता लभरी, एवं इसक द्वाया बायत भें कद्रीम प्रशासन की नींव यखी गमी । े ें © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 5. अधधननयम की ववशेषताएं www.upscportal.com •इस अधधयनमभ द्वाया फंगार क गवनटय को श ् फंगार का गवनटय े जनयर श ् ऩद नाभ टदमा गमा एवं उसकी सहामता क लरए एक चाय े सदस्मीम कामटकायी ऩरयषद का गठन ककमा गमा। उल्रेखनीम है कक ऐसे ऩहरे गवनटय जनयर राॅॎिट वाये न हे जस्िं ग्स थे । •इसक द्वाया भद्रास एवं फंफई क गवनटय, फंगार क गवनटय जनयर क े े े े अधीन हो गमे, जफकक ऩहरे सबी प्रेलसिेंलसमों क गवनटय एक-दसये से े ू अरग थे । •अधधयनमभ क अंतगटत करकत्ता भें 1774 भें एक उच्चतभ े न्मामारम की स्थाऩना की गई, जजसभें भख्म न्मामाधीश औय तीन ु अन्म न्मामाधीश थे । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 6. www.upscportal.com •इसक तहत कऩनी क कभटचारयमों को यनजी व्माऩाय कयने े ं े औय बायतीम रोगों से उऩहाय व रयसवत रेना प्रयतफंधधत कय टदमा गमा । •इस अधधयनमभ क द्वाया, ब्रिटिश सयकाय का श ् कोिट े आॅॎप िामये क्िसट श ् (कऩनी की गवयनिंग फाॅॎिी) क ं े भाध्मभ से कऩनी ऩय यनमंत्रण सशक्त हो गमा। इसे बायत ं भें इसक याजस्व, नागरयक औय सैन्म भाभरों की े जानकायी ब्रिटिश सयकाय को दे ना आवसमक कय टदमा गमा © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 7. 1784 का वऩट्स इंडिया एक् www.upscportal.com •ये गरेटिंग एक्ि, 1773 की कलभमों को दय कयने क लरए े ु ू ब्रिटिश संसद ने एक संशोधधत अधधयनमभ 1781 भें ऩारयत ककमा, जजसे एक्ि आॅॎप सैिरभें ि क नाभ से बी जाना े जाता है । •इसक फाद एक अन्म भहत्वऩणट अधधयनभम वऩिस इंडिमा े ू एक्ि, 1784 भें अजस्तत्व भें आमा । © 2013 UPSCPORTAL .COM
  • 8. अधधननयम की ववशेषताएं www.upscportal.com इसने कऩनी क याजनैयतक औय वाणणजयमक कामों को ं े ऩथक-ऩथक कय टदमा । ृ ृ इसने यनदे शक भंिर को कऩनी क व्माऩारयक भाभरों क ं े े अधीऺण की अनभयत तो दे दी रेककन याजनैयतक भाभरों ु क प्रफंधन क लरए यनमंत्रण फोिट (फोिट आॅॎप कट्रोर) नाभ े े ं से एक नए यनकाम का गठन कय टदमा। इस प्रकाय, द्वैध शासन की व्मवस्था का शुबायं ब ककमा गमा । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 9. www.upscportal.com •यनमंत्रण फोिट को मह शजक्त थी कक वह ब्रिटिश यनमंब्रत्रत बायत भें सबी नागरयक, सैन्म सयकाय व याजस्व गयतववधधमों का अधीऺण एवं यनमंत्रण कये । इस प्रकाय, मह अधधयनमभ दो कायणों से भहत्वऩणट था- ऩहरा बायत ू भें कऩनी क अधीन ऺेत्र को ऩहरी फाय श ् ब्रिटिश ं े आधधऩत्म का ऺेत्र श ् कहा गमा दसया ब्रिटिश सयकाय को ू बायत भें कऩनी क कामों औय इसक प्रशासन ऩय ऩणट ं े े ू यनमंत्रण प्रदान ककमा गमा । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 10. 1833 का चा ट र अधधननयम www.upscportal.com ब्रिटिश बायत क कद्रीमकयण की टदशा भें मह अधधयनमभ े ें यनणाटमक कदभ था। इस अधधयनमभ की ववशेषतामें यनम्नानुसाय थीं: अधधननयम की ववशेषताएं इसने फंगार क गवनटय जनयर को बायत का गवनटय े जनयर फना टदमा, जजसभें सबी नागरयक औय सैन्म शजक्तमां यनटहत थीं। इस प्रकाय, इस अधधयनमभ ने ऩहरी फाय एक ऐसी सयकाय का यनभाटण ककमा, जजसका ब्रिटिश कच्चे वारे संऩूणट बायतीम ऺेत्र ऩय ऩूणट यनमंत्रण था। राॅॎिट ववलरमभ फैंटिक बायत क प्रथभ गवनटय जनयर थे । े © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 11. www.upscportal.com •इसने भद्रास औय फंफई क गवनटयों को ववधायमका संफधी े ं शजक्त से वंधचत कय टदमा। बायत क गवनटय जनयर को ऩूये े ब्रिटिश बायत भें ववधायमका क असीलभत अधधकाय प्रदान े कय टदमे गमे। इसक अंतगटत ऩहरे फनाए गए काननों को े ू यनमाभक कानून कहा गमा औय नए कानून क तहत फने े काननों को एक्ि मा अधधयनमभ कहा गमा । ू •ईस्ि इंडिमा कऩनी की एक व्माऩारयक यनकाम क रूऩ भें ं े की जाने वारी गयतववधधमों को सभाप्त कय टदमा गमा। अफ मह ववशुद्ध रूऩ से प्रशासयनक यनकाम फन गमा। इसक े तहत कऩनी क अधधकाय वारे ऺेत्र ब्रिटिश याजशाही औय ं े उसक उत्तयाधधकारयमों क ववसवास क तहत ही कब्जे भें यह े े े गए । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 12. www.upscportal.com •चािट य एक्ि 1833 ने लसववर सेवकों क चमन क लरए े े खुरी प्रयतमोधगता का आमोजन शुरू कयने का प्रमास ककमा। इसभें कहा गमा कक कऩनी भें बायतीमों को ककसी ं ऩद, कामाटरम औय योजगाय को हालसर कयने से वंधचत नहीं ककमा जामेगा। हारांकक कोिट आॅॎप िामये क्िसट क े ववयोध क े कायण इस प्रावधान को सभाप्त कय टदमा गमा । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 13. 1853 का चा ट र अधधननयम www.upscportal.com 1793 से 1853 क दौयान ब्रिटिश संसद द्वाया ऩारयत ककए गए चािट य े अधधयनमभों की श्खरा भें मह अंयतभ अधधयनमभ था। ंृ संवैधायनक ववकास की दृजटि से मह अधधयनमभ एक भहत्वऩणट ू अधधयनमभ था। इस अधधयनमभ की ववशेषतामें यनम्नानसाय थींॅ् ु 1793 से 1853 क दौयान ब्रिटिश संसद द्वाया ऩारयत ककए गए चािट य े अधधयनमभों की श्खरा भें मह अंयतभ अधधयनमभ था। ंृ संवैधायनक ववकास की दृजटि से मह अधधयनमभ एक भहत्वऩणट ू अधधयनमभ था। इस अधधयनमभ की ववशेषतामें यनम्नानसाय थींॅ् ु अधधननयम की ववशेषताएं इसने ऩहरी फाय गवनटय जनयर की ऩरयषद क ववधामी एवं े प्रशासयनक कामों को अरग कय टदमा। इसक तहत ऩरयषद भें छह े नए ऩाषटद औय जोड़े गए इन्हें ववधान ऩाषटद कहा गमा। इसने ऩहरी फाय गवनटय जनयर की ऩरयषद क ववधामी एवं े प्रशासयनक कामों े Click Here To Join Online IAS Mains Coaching © 2013 UPSCPORTAL .COM को अरग कय टदमा। इसक तहत ऩरयषद भें छह
  • 14. www.upscportal.com •इसने लसववर सेवकों की बती एवं चमन हे तु खरी ु प्रयतमोधगता व्मवस्था का शुबायं ब ककमा, इस प्रकाय ववलशटि लसववर सेवा बायतीम नागरयकों क लरए बी खोर े दी गई औय इसक लरए 1854 भें (बायतीम लसववर सेवा क े े संफंध भें ) भैकारे सलभयत की यनमक्त की गई । ु •इसने कऩनी क शासन को ववस्तारयत कय टदमा औय ं े बायतीम ऺेत्र को इंग्रैंि याजशाही क ववसवास क तहत े े कच्चे भें यखने का अधधकाय टदमा। रेककन ऩूवट अधधयनमभों क ववऩयीत इसभें ककसी यनजसचत सभम का यनधाटयण नहीं े ककमा गमा था। © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 15. www.upscportal.com • इसने प्रथभ फाय बायतीम कद्रीम ववधान ऩरयषद भें ें स्थानीम प्रयतयनधधत्व प्रायं ब ककमा। गवनटय-जनयर की ऩरयषद भें छह नए सदस्मों भें से, चाय का चनाव फंगार, ु भद्रास, फंफई औय आगया की स्थानीम प्रांतीम सयकायों द्वाया ककमा जाना था। © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 16. 1858 का भारत शासन अधधननयम www.upscportal.com इस भहत्वऩणट कानन का यनभाटण 1857 क ववद्रोह क फाद े े ू ू ककमा गमा, जजसे बायत का प्रथभ स्वतंत्रता संग्राभ मा लसऩाही ववद्रोह बी कहा जाता है । बायत क शासन को े अच्छा फनाने वारा अधधयनमभ नाभ क प्रलसद्ध इस कानन े ू ने, ईस्ि इंडिमा कऩनी को सभाप्त कय टदमा औय गवनटयों, ं ऺेत्रों औय याजस्व संफंधी शजक्तमां ब्रिटिश याजशाही को हस्तांतरयत कय दीं। अधधननयम की ववशेषताएं 1. इसक तहत बायत का शासन सीधे भहायानी े ववक्िोरयमा क अधीन चरा गमा। गवनटय जनयर का े ऩदनाभ फदरकय बायत का वामसयाम कय टदमा गमा। वह (वामसयाम) बायत भें ब्रिटिश ताज का प्रत्मऺ प्रयतयनधध फन गमा। राॅॎिट कयनंग बायत क प्रथभ वामसयाम फने । ै े © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 17. www.upscportal.com •इस अधधयनमभ ने यनमंत्रण फोिट औय यनदे शक कोिट सभाप्त कय बायत भें शासन की द्वैध प्रणारी सभाप्त कय दी । •एक नए ऩद, बायत क यायम सधचव, का सजन ककमा गमा े ृ जजसभें बायतीम प्रशासन ऩय संऩणट यनमंत्रण की शजक्त ू यनटहत थी। मह सधचव ब्रिटिश कब्रफनेि का सदस्म था ै औय ब्रिटिश अंतत् संसद क प्रयत उत्तयदामी था । े •बायत सधचव की सहामता क लरए 15 सदस्मीम ऩरयषद े का गठन ककमा गमा, जो एक सराहकाय सलभयत थी। ऩरयषद का अध्मऺ बायत सधचव को फनामा गमा।ण ् © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 18. www.upscportal.com •इस कानन क तहत बायत सधचव की ऩरयषद का गठन े ू ककमा गमा. जो एक यनगलभत यनकाम थी औय जजसे बायत औय इंग्रैंि भें भकदभा कयने का अधधकाय था। इस ऩय बी ु भुकदभा ककमा जा सकता था । •1858 क कानन का प्रभख्म उद्देसम, प्रशासयनक भशीनयी े ू ु भें सधाय था, जजसक भाध्मभ से इंग्रैंि भें बायतीम सयकाय े ु का अधीऺण उसका यनमंत्रण हो सकता था। इसने बायत भें प्रचलरत शासन प्रणारय भें कोई ववशेष ऩरयवतटन नहीं ककमा। © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 19. 1861, 1892 और 1909 क ऩररषद े अधधननयम www.upscportal.com •1857 की भहान क्रांयत क फाद ब्रिटिश सयकाय ने भहसूस े ककमा कक बायत भें शासन चराने क लरए बायतीमों का े सहमोग रेना आवसमक, है । इस सहमोग नीयत क तहत े ब्रिटिश संसद ने 1861, 1892 औय 190 भें तीन नए अधधयनमभ ऩारयत ककए। 1861 का ऩरयषद अधधयनमभ बायतीम संवैधायनक औय याजनैयतक भें एक भहत्वऩूणट अधधयनमभ था । © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching
  • 20. www.upscportal.com अधधक जानकायी क लरए महां जक्रक कयें े http://www.upscportal.com/civilservices/courses/ias-pre/csat-paper-1hindi © 2013 UPSCPORTAL .COM Click Here To Join Online IAS Mains Coaching

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